Friday, July 20, 2018

भाजपा शासनकाल में किसानों की आर्थिक स्थिति बदतर हुई- अभय चौटाला 


चंडीगढ़, 20 जुलाई 2018: नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार ने गन्ने की फसल का मूल्य निर्धारण स्वयं की सिफारिशों के अनुसार किया नहीं और दूसरी तरफ किसानों की बकाया राशि का भुगतान करने में जानबूझकर अनावश्यक देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 का पिराई सत्र बन्द हुए तीन महीने से भी ’यादा का समय हो चला है मगर अभी तक प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों की तरफ से किसानों की बकाया राशि का भुगतान करने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है, जो भाजपा किसान हितैषी होने का नकाब उतारती है जबकि वास्तविकता यह है की जब से भाजपा शासन आया है तब से किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हुई है।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की सहकारी व गैर सहकारी चीनी मिलों द्वारा तीन महीने पहले ख़त्म हो चुके सीजन का लगभग 600 करोड़ रुपए की बकाया राशि का अभी किसानों को भुगतान किया जाना बाकी है। जिनमें लगभग 400 करोड़ रुपए सहकारी मिलों के और 200 करोड़ रूपये से ’यादा की राशि का गैर सहकारी चीनी मिलों द्वारा भुगतान किया जाना शेष है। जिसमें जींद सहकारी चीनी मिल की तरफ से किसानों का 27 करोड़, रोहतक मिल 52 करोड़, गोहाना मिल &2 करोड़, महम मिल 44 करोड़, शाहबाद मिल 72 करोड़, करनाल मिल का &8 करोड़, कैथल मिल 40 करोड़, पानीपत मिल &9 करोड़, सोनीपत मिल 25 करोड़ और पलवल मिल की तरफ से 26 करोड़ की राशि बकाया है। 
नेता प्रतिपक्ष ने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में गन्ना पिराई सत्र आरम्भ होने से पहले भी उन्होंने न सिर्फ प्रदेश विधानसभा के सदन में बल्कि मिडिया के माध्यम से भी सरकार को गन्ना बोर्ड की मीटिंग में न केवल गन्ने के दामों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार निर्धारित करने अपितु गन्ने की खरीद की नीति को सुचारू एवं किसान हितैषी बनाने का भी निर्णय करने के लिए चेताया था। उन्होंने कहा कि बीते सीजन में केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के एफआरपी (फेयर एंड रिम्यूनिरेटिव प्राइस) को अगेती गन्ने की फसल के दाम को 255 रुपए प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया गया था। वहीं दूसरी तरफ पिछले वर्ष रा’य में अगेती फसल का स्टेट एडवाइ’ड प्राइस (एसएपी) मूल्य &20 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था और पछेती फसल का &10 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। परंतु वह मूल्य न केंद्र सरकार और न ही रा’य सरकारों द्वारा अपनी सिफारिशों के बावजूद किसानों को दिया गया।
इनेलो नेता ने कहा कि असल में किसानों का भुगतान मिलों द्वारा गन्ना प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए ताकि किसानों की आर्थिक हालत को कुछ हद तक दुरुस्त किया जा सके। भुगतान करने में इससे ’यादा जितनी भी देरी हो उसका ब्याज किसानों को दिया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार चीनी मिल पिराई प्रबन्धन में एक बार फिर से पूर्ण रूप से नाकाम रही है और किसानों का लगभग 50 प्रतिशत गन्ना ही सरकार ने खरीदा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अगले सत्र की शुरुआत से पहले 40-50 लाख टन क‘ची चीनी के निर्यात की भी घोषणा करनी चाहिए ताकि चीनी मिलें अगले सत्र के आरंभ से क‘ची चीनी के लिए योजना बना सकें और उत्पादन के साथ ही इसका निर्यात भी कर सकें, क्योंकि इससे चीनी मिलों पर चीनी के अधिक भंडार को लेकर आगे बढऩे का बोझ कम होगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा की हाल ही में केन्द्र सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू ना कर गन्ने सहित कुछ फसलों पर समर्थन मूल्य बढ़ाकर झूठी वाहवाही लूटने का प्रयास किया था। जबकि हरियाणा के किसान के साथ जो भद्वा मजाक भाजपाईयों ने किया है, उसके लिए उन्हें कभी प्रदेश का किसान और कमेरा वर्ग माफ नहीं करेगा।

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