Monday, March 5, 2018

दिल्ली के रामलीला मैदान से लिखी गई है कई राजनीतिक परिवर्तन की इबारत - दुष्यंत चौटाला 


नई दिल्ली : इंडियन नेशनल लोकदल की दिल्ली में 7 मार्च को किसान रैली की तैयारियों के लिए इनेलो संसदीय दल के नेता व हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला ने रामलीला मैदान का दौरा किया। दुष्यंत चौटाला ने रैली स्थल का निरीक्षण किया और रैली स्थल पर विभिन्न तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने रामलीला मैदान में ही रैली की तैयारियों में लगे प्रभारियों के साथ बैठक कर विभिन्न पहलुओं को लेकर विचार विमर्श किया। सांसद दुष्यंत चौटाला ने कहा कि किसानों की मांगों और उनके अधिकारों को लेकर हरियाणा, दिल्ली व अन्य प्रदेशों से भारी संख्या में लोग पहुंचेगे। भारी भीड़ के मुद्देनजर उन्होंने रैली आयोजन कमेटी के साथ इस बार पर गहन मंथन किया कि उनकी वजह से दिल्ली में जाम की स्थिति उत्पन्न न हो और आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़ा। इस अवसर पर इनेलो के प्रदेश कार्यालय सचिव नक्षत्र सिंह मल्हान, दिल्ली प्रदेश के पार्टी प्रवक्ता दिनेश डागर, इनेलो के वरिष्ठ नेता शैंपी फोगाट,युवा प्रदेशाध्यक्ष सुमित राणा, प्रदेश प्रवक्ता दलबीर सिंह धनखड़, प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण अत्रैय, कृष्ण सांगवान आदि उपस्थित थे। बैठक में रैली में ताऊ देवीलाल सेना नायक दल के सदस्यों की डयूटियां लगाने, पार्किंग व्यवस्था पर विचार विमर्श किया जिससे कि लोगों को रैली स्थल तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े। 
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि भाजपा के साढ़े तीन वर्ष के शासनकाल में किसानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ी है और वे कर्ज के मर्ज में और फंसते जा रहे हैं। सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसानों मजदूरों में सरकार के प्रति भारी रोष है और वह दिल्ली में अपनी ताकत प्रदर्शित कर भाजपा सरकार चूलें हिला देंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार एसवाईएल नहर का निर्माण नहीं कर रही है जिससे किसानों के खेत सूखे पड़े हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान से राजनैतिक परिवर्तन नींव पड़ी हैं और सत्ता परिवर्तन का इतिहास लिखा गया है। उन्होंने किसानों के मसीहा चौ. देवीलाल के संस्मरण को याद करते हुए कहा कि दादा मुझे बताया कि जो रामलीला मैदान के मंच से बोलता है, उसे पूरा देश सुनता है। इनेलो सांसद ने कहा कि 7 मार्च को एक बार फिर से इसी मैदान से किसान सत्ता के खिलाफ हुंकार भरने जा रहे हैं। 

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