Wednesday, January 10, 2018

धार्मिक ग्रंथों को तो बख्स दो भाजपाईयों - दिग्विजय चौटाला 

भिवानी, 10 जनवरी : आए दिन धर्म मजहब जात-पात के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेकने वाली भाजपा ने तो धार्मिक ग्रंथों को भी नहीं बख्सा। अगर इन लोगों में थोड़ी सी भी गैरत है तो सार्वजनिक मंच पर जनता से माफी मांगनी चाहिए। यह बात इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने गीता जयंती महोत्सव में गीता ग्रंथ की प्रतियां खरीदने में लाखों के गोलमाल पर बोलते हुए कहे। इनसो अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री को स्वयं इस बात के लिए माफी मांगनी चाहिए और जवाब देना चाहिए कि जो गीता महोत्सव आयोजन में गोलमाल किया गया है, वह सही है। इसके लिए मुख्यमंत्री को अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि आरटीआइ के माध्यम से खुलासा हुआ है कि गीता ग्रंथ की दस प्रतियां 3 लाख 79 हजार 500 रुपये में खरीदी गई। यानी की एक गीता ग्रंथ की कीमत 37 हजार से अधिक बैठती है। जबकि गीता ग्रंथ का मार्केट में रेट बहुत कम हम है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में तो 40 पैसे में एक गीता उपलब्ध करवा रहे हैं, जबकि ऑनलाइन इसकी कीमत 200 से 300 रुपये मात्र है। लेकिन धर्म, मजहब, गाय, गीता का राग अलापने वाले भाजपाईयों ने तो बेशर्मी की सभी हदों को पार कर दिया और इन महानुभावों ने पवित्र ग्रंथ गीता की खरीद में ही लाखों का घपला कर दिया।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि गीता महोत्सव आयोजन में हुए इस लाखों के गोलमाल को दुष्यंत चौटाला के माध्यम से सीएजी के समक्ष रख उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे। गीता ग्रंथ खरीद के साथ साथ भाजपा सांसद हेमामालिनी को दस लाख व दिल्ली भाजपा के गायकी नेता को लाखो रुपये देना इस मामले को ओर गम्भीर बना देता है दिग्गिवजय ने कहा की कार्यक्रम मे खाने और पानी का बिल देखकर तो ये साफ हो जाता है की लुटखसोट करना भाजपा का पेसा बन गया है ।गीता ग्रंथ मामले ने भाजपा की साफ स्वच्छ सरकार के नारे की पोल खोल दी है। इन बातों से साफ पता चलता है कि अंदर ही अंदर लाखों करोड़ों के गोलमाल की नींव रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जमीनी स्तर पर भाजपा सरकार के कारनामों की जांच करवाई जाए तो बड़ा मामला सामने आना लाजमी है। प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए दिग्विजय ने कहा कि नाकाम प्रदेश सरकार विकास करवाने में तो पहले ही जीरो साबित हुई। अब भाजपा की ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि इन लोगों ने गीता ग्रंथ को ही निशाने रख दिया और लाखों का गोलमाल कर दिया।

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