Wednesday, June 21, 2017

अभय चौटाला ने सरकारी खर्च पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी मनाने पर जताई आपत्ति, सीएम को लिखा पत्र   


चंडीगढ़, 19 जून: नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला ने मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिख कर कहा कि एक किसान होने और चौधरी देवी लाल जी, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता में भूमिका निभाने के साथ राज्य में मुजारों के अधिकार की लड़ाई का नेतृत्व भी किया था, के पौत्र होने के नाते इस बात पर खेद व्यक्त किया कि राज्य सरकार द्वारा चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी को याद भी नहीं किया गया। उन्होंने राज्य की स्वर्ण जयंती समारोह की आड़ में सरकारी खर्चे से पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी मनाने के निर्णय पर भी आपत्ती जताई है। उन्होंने याद दिलाया कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय मूल रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जन संघ के एक चिंतक थे। कालांतर में इसी भारतीय जन संघ ने वर्तमान की भारतीय जनता पार्टी का रूप लिया जो आज राज्य और केन्द्र में सत्तासीन है।
श्री अभय सिंह चौटाला ने कहा कि उनकी जानकारी में हरियाणा के उत्थान अथवा उसके निर्माण या विकास में पंडित दीन दयाल उपाध्याय का किसी भी प्रकार का योगदान नहीं है। इसीलिए उन्हें आश्चर्य है कि सरकारी कोष से एक ऐसे व्यक्ति का जन्म शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है जिसका हरियाणा के जीवन में किसी प्रकार का योगदान नहीं है। उन्होंने तो इस बात की भी आशंका जताई कि उनका आधुनिक भारत के निर्माण में कोई योगदान है और कहा कि शायद उनकी कथित उपलब्धियां भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद किवदंतियां बन कर उभर रही हैं और यह जन्म शताब्दी समारोह उसी कड़ी का हिस्सा हो।
नेता विपक्ष ने यह स्वीकार किया कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत होंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और मुख्यमंत्री सहित सभी नेताओं के लिए वह प्रेरणा भी होंगे। परंतु उन्होंने आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री यह स्वीकार करेंगे कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के लिए एक आंतरिक समारोह  उत्सव की तरह मनाया जा सकता है। ऐसे में जब उसे मनाने के लिए हरियाणा राज्य के कोष से करोडों रूपये खर्च किये जाएं तो व्यक्तिगत स्तर भी और नेता विपक्ष होने के नाते उन्हें आपत्ती है और वह सत्ता के ऐसे दुरुपयोग का विरोध करते हुए उसे भ्रष्टाचार की संज्ञा देते हैं।
अंत में श्री अभय सिंह चौटाला ने स्वीकार किया कि वह इस बात की संभावना से इन्कार नहीं करते कि उन्होंने यह टिप्पणी समय से पहले ही कर दी हो और शायद हरियाणा सरकार हरियाणा के उन सभी सपूतों का जीवन उत्सव मनाने की योजना बना रही हो जिन्होंने हरियाणा के निर्माण में योगदान भी किया और बलिदान भी दिया। यदि ऐसा है तो उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उन लोगो की सूचि उन्हें प्रेषित करने के साथ उसे सार्वजनिक भी करें, परंतु यदि ऐसा नहीं है तो उन्होंने कहा कि इस प्रकार से सरकारी कोष से किये जाने वाले खर्चे का विरोध करते हुए यह आग्रह करते हैं कि इसे तुरंत प्रभाव से रोका जाए।

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