Friday, June 16, 2017

मंदसौर में 6 किसानों की मौत के विरोध में इनेलो ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा  


पचकूला, 16 जून : मन्दसौर में पुलिस की गोली से 6 किसानों की मौत के विरोध में शुक्रवार पंचकूला इनेलो ने मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज का पुतला फूंका और राष्ट्रपति के नाम डीसी के माध्यम से एसडीएम को पूर्व विधायक एवम् जिला प्रधान प्रदीप चौधरी के नेतृत्व में ज्ञापन सोपा।
इससे पूर्व माजरी चोंक के पास मोरनी, रायपुररानी, बरवाला, पिंजौर, कालका, पंचकूला क्षेत्र से भारी संख्या में कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक एकजुट हुए और सीएम खट्टर और शिवराज के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक एवम् जिला प्रधान प्रदीप चौधरी ने संयुक्त रूप से कहा की वर्ष 2014 में लोकसभा चुनावों के पूर्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने घोषणा पत्र में और हरियाणा विधानसभा चुनावों से पूर्व चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए स्वामीनाथन रिपोर्ट की न्यूनतम समर्थन मूल्य बारे सिफारिशों को लागू करने का वायदा किया था। यह वायदा घोषणा पत्र के अनेक वायदों में से एक न समझा जाए, इसे सुनिष्चित करने के लिए नरेन्द्र मोदी सहित सभी भाजपा नेताओं ने अपनी चुनावी सभाओं में बार-बार दोहराया था। देश के किसान इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि कांग्रेस से भिन्न होने का दावा करने वाली भाजपा अपने घोषणा पत्र की शुचिता को बनाए रखेगी। यह खेद की बात है कि देश की जनता और विशेष रूप से किसानों का समर्थन पाने के बाद, भाजपा ने सत्ता प्राप्त करने के बाद न केवल अपने वायदे को लागू करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की बल्कि किसानों को यह कह कर लुभानेे का प्रयास किया कि वर्ष 2022 तक उनकी आमदनी दुगनी कर दी जाएगी।
मान्यवर, यह सर्वविदित है कि किसान केवल अपनी कृषि से होने वाली आमदनी पर ही निर्भर रहता हैं। इसके लिए उसे सहकारी बैंकों तथा आढ़तियों से कर्ज लेना पड़ता है। उक्त दोनों कर्जदाता समय पर ब्याज सहित उस कर्ज की वसूली भी करते हैं। पंरतु जब खेती निरंतर घाटे का सौदा बन जाए तब उस कर्ज और उसके तनाव से निपटना किसान के लिए बहुत कठिन हो जाता है। इसी का परिणाम है किसान आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहा है।


प्रदीप चौधरी ने कहा की पिछले पांच वषों में औसतन 17000 किसान आत्महत्या करते आ रहे हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए स्वामीनाथन की अध्यक्षता में कृषि आयोग स्थापित किया गया था। उसी आयोग की सिफारिशों को भाजपा ने लागू करने का वायदा किया था। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिषों को लागू न करने के परिणाम स्वरूपआज मध्यप्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों के किसान कर्ज में डूबे हुए हैं और इस दबाव में आए दिन आत्महत्याएं करने पर विवश हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद भी आत्महत्याओं का ग्राफ बढ़ा है। हताशा की इस सीमा पर खड़ा किसान, अब मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों की तरह सड़कों पर उतर रहा है और उसे पुलिस की गोलियों का सामना करना पड़ रहा है। बडे दुर्भाग्य की बात है कि मध्यप्रदेष के किसानों द्वारा इन्ही समस्याओं को निपटने बारे। सरकार से बार-बार अनुरोध किया गया परंतु कोई ध्यान न देने के कारण उन्हें सड़क पर आकर प्रदर्षन करना पड़ा। प्रदर्षनकारियों का दमन करने के लिए सरकार द्वारा निहत्थे किसानों पर गोलियां चलाई गई जिससे अब तक छ: किसानों की मृत्यू हो चुकी है।
 इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष व्यापार सेल कुलभूषण गोयल, प्रदेश प्रवक्ता प्रवीन आत्रेय, जिला प्रवक्ता एस.पी अरोड़ा, महिला प्रधान सीमा चौधरी, दिलबाग नैन, हरबंस सिंगला, युवा जिला प्रधान सोनू हरयोली, बलवंत भींवर, रमेश मांधना, महासचिव जरनैल मानकपुर, अशोक सिंगला, सुभाष निषाद, दयाल चन्द धीमान, रामप्रताप, प्रधान महासचिव विजेंदर कामी, मदन जस्सल,  शरणजीत काका फिरोज़पुर, कर्ण नम्बरदार, लाभ सिंह, आज़ाद, युवा हल्का प्रधान मंदीप करणपुर, मालिक, सुरेंदर कुंडू, हर्ष गुजराल, राजू वाजिदपुर, जसबीर सिंह, गुरिंदर रैल्ली, नीरज भल्ला, गुरविंदर ठरवा, मास्टर छज्जू राम, राय सिंह, महेंदर श्योराण, राजकुमार खोखरा, मलकीत गुडू, भगतु दमदमा, सुखबीर ककराली, विपिन बागवाली, अकबर खान, बलदेव सैनी, श्याम बुंगा, नायब बुंगा, रामकरण और परमाल रत्तेवाली, शमशेर, पम्मी, तरसेम पारवाला, बक्शीश बिलाह, देव नाडा,  रमला, रशीद खान, सुरता नम्बरदार, पोला भानू इत्यादि मौजूद थे।

No comments:

Post a Comment