Friday, June 24, 2016

सांसद दुष्यंत चौटाला बिजली सब डिवीजनों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की मांगों का किया समर्थन, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र


हिसार, 25 जून : इनेलो सांसद दुष्यन्त चौटाला ने बिजली विभाग की 23 सब डिवीजनों के निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए कर्मचारियों की मांगो का समर्थन किया है। इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला ने इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस निजीकरण को रद्द किये जाने की मांग की है। उन्होंने सरकार द्वारा किये जा रहे 23 सब डिवीजनों के निजीकरण का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने जिन 23 सब डिवीजनों का निजीकरण करने का फैसला किया है, वे सब तो अच्छा लाभ दे रही है। उन्होंने सरकार की मंशा पर शंका जाहिर करते हुए कहा कि इस फैसले के पीछे सरकार के कुछ मंत्रियों के निजी हित भी हो सकते है क्यों कि जिन कम्पनियो को इन सब डिवीजनों को सौंपा जायेगा उनमे सरकार के मंत्रियों की हिस्सेदारी भी हो सकती है। इनेलो सांसद ने सरकार द्वारा निजीकरण के पक्ष में उपभोक्ता को बेहतर सर्विस देने के तर्क पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि भूतकाल में भी सरकार द्वारा किये गए निजीकरण के कोई सार्थक परिणाम नही आये। क्योंकि निजीकरण किये जाने पर निजी कम्पनियां तो केवल अपने लाभ को देखेगी, उन्हें आम जनता व कर्मचारियों से कोई सरोकार नहीं होगा। जिससे आम जनता के साथ साथ कर्मचारियों पर भी इसका विपरीत असर पड़ेगा। इनेलो सांसद चौटाला ने कहा कि अगर सरकार को निजीकरण करना ही है तो पहले इसके लिए एक पारदर्शिता पूर्ण नीति बनाये उसके बाद उन डिवीजनों व विभागों का निजीकरण करे जो ज्यादा घाटे में चल रहे है। पत्र के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री से आम जनता व कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इसे तुरन्त प्रभाव से रद्द करने की माँग की है। साथ ही साथ उन्होंने सरकार द्वारा एस्मा लगाये जाने पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र रूपी चुनावी घोषणा पत्र में कर्मचारियों से दर्जनों लोक लुभावने वायदे किये थे परन्तु सत्ता में आने के बाद बीजेपी इन वायदों को पूर्ण रूप से भूल चुकी है। बीजेपी सरकार बनने के बाद से प्रदेश के अध्यापक, रोडवेज के कर्मचारियों व बिजली कर्मचारियों सहित हर विभाग के कर्मचारी अपनी जायज मांगो के लिए संघर्षरत है। परन्तु सरकार इनकी मांगों को पूरा करने की बजाये एस्मा लगाकर इनकी आवाज को दबाने का प्रयास करके ताना शाही रवैया अपना रही है। इनेलो सांसद ने सरकार के इस कदम की निंदा करते हुए मांग की कि एस्मा लागू करने की बजाये कर्मचारियों की मांगों पर विचार करे ताकि हड़ताल से प्रदेश को होने वाले नुक्सान से बचाया जा सके।

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